पति के भ्रष्टाचार में पत्नी भी दोषी
दिल्ली कोर्ट के नवीनतम निर्णय के अनुसार पति के भ्रष्टाचार में पत्नी कोभी भागीदार माना जायेगा और उसे भी सजा हो सकती है दिल्ली की विशेष सीबी आई अदालत ने ऐसा ही एक फैसला सुनाया है दिल्ली नगर निगम के रिटायर्ड इंजिनियर को आय से १२० गुना अधिक सम्पति रखने का दोषी पाया है इस इंजिनियर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भ्रष्टाचार के जरिये अपने कार्यकाल में आय से अधिक सम्पति जमा कीअदालत ने पति को तीन साल की कैद और और पाँच लाख जुरमाना की सजा सुनाई है वाही पत्नी को पति के साथ भ्रष्टाचार में शामिल होने और सहयोग देने हेतु एक साल की कैद और ढाई लाख रूपये का जुरमाना लगाया है
पत्नी के द्वारा दी गयी यह दलील कि पति के हर भले-बुरे काम में पत्नी को साथ देना ही होता है को न्यायालय ने अमान्य कर दिया और कहा कि इस आधार पर पत्नी को बरी नही किया जा सकता . पत्नी को भी भ्रष्टाचार में पति का साथ देने और पति को भ्रष्टाचार करने से न रोकने के कारण. सजा भुगतनी होगी पत्नी ने पति द्वारा भ्रष्टाचार से कमाई गयी काली कमाई को वैध बनाने में पूरा सहयोग दिया और उसकी पूरी मदद की
दिल्ली कोर्ट का यह फैसला सराहनीय है पत्नी, जो पति की सहधर्मी है, गृह लक्ष्मी है जब वह पति को भ्रष्टाचरण करने से रोकने की बजाय उसे सहयोग और समर्थन करती है तो ऐसे घर के बच्चे भ्रष्ट आचरण की नयी फसल बन कर खड़े हो जाते है.जो परिवार , समाज और देश के लिए घातक होते है ऐसे मां -बाप अपने बच्चों को क्या सही राहों पर चला सकते हैं जो खुद ही भ्रष्ट हैं! हमारे धरम ग्रंथों में ऐसे बहुत से उदाहरण हैं जहाँ पति के गलत कामों में पत्नी ने साथ देने से मना कर दिया और खुद को पति के गलत कामों से अलग कर लिया
बहुत हद तक बाज़ार भी दोषी है जो नित नए तरीकों से ग्राहकों को लुभाने के प्रयास करता है और ग्राहक उस जाल में फंस जाते है उनकी इक्छाएं भी सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती ही जाती है.नित नए आकर्षण , फैशन , वस्तुओं के चमक-दमक में आदमी की सही और गलत का निर्णय करने की समझ ही कहीं खो गयी है पत्नियाँ भी इसी भौतिक सुख-सुविधाओं , और फैशन के आकर्षण में साथ ही ,एक दूसरे से होड़ के चक्कर में पतियों से और अधिक, और पैसा की मांग करती रहती है जो की सर्वथा अनैतिक और अनुचित है. पत्नियों को जितनी पति की कमाई है उसी में संतोष करते हुए घर चलाना चाहिए.भ्रष्टाचार बढ़ने का ये भी एक बड़ा कारण हुआ है.
ये निर्णय शायद कुछ सकारात्मक प्रभाव लाये और महिलाएं अपनी भूमिका सही तरीके से निभाए पति को न तो गलत काम करने हेतु उकसाए, न ही भ्रष्टाचार में उनका साथ दें सकारात्मक भूमिका निभाते हुए परिवार , समाज और देश को भ्रष्टाचार से मुक्त बनाएं
अनुपमा श्रीवास्तव (अनुश्री), भोपाल ,म.प्र
दिल्ली कोर्ट के नवीनतम निर्णय के अनुसार पति के भ्रष्टाचार में पत्नी कोभी भागीदार माना जायेगा और उसे भी सजा हो सकती है दिल्ली की विशेष सीबी आई अदालत ने ऐसा ही एक फैसला सुनाया है दिल्ली नगर निगम के रिटायर्ड इंजिनियर को आय से १२० गुना अधिक सम्पति रखने का दोषी पाया है इस इंजिनियर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भ्रष्टाचार के जरिये अपने कार्यकाल में आय से अधिक सम्पति जमा कीअदालत ने पति को तीन साल की कैद और और पाँच लाख जुरमाना की सजा सुनाई है वाही पत्नी को पति के साथ भ्रष्टाचार में शामिल होने और सहयोग देने हेतु एक साल की कैद और ढाई लाख रूपये का जुरमाना लगाया है
पत्नी के द्वारा दी गयी यह दलील कि पति के हर भले-बुरे काम में पत्नी को साथ देना ही होता है को न्यायालय ने अमान्य कर दिया और कहा कि इस आधार पर पत्नी को बरी नही किया जा सकता . पत्नी को भी भ्रष्टाचार में पति का साथ देने और पति को भ्रष्टाचार करने से न रोकने के कारण. सजा भुगतनी होगी पत्नी ने पति द्वारा भ्रष्टाचार से कमाई गयी काली कमाई को वैध बनाने में पूरा सहयोग दिया और उसकी पूरी मदद की
दिल्ली कोर्ट का यह फैसला सराहनीय है पत्नी, जो पति की सहधर्मी है, गृह लक्ष्मी है जब वह पति को भ्रष्टाचरण करने से रोकने की बजाय उसे सहयोग और समर्थन करती है तो ऐसे घर के बच्चे भ्रष्ट आचरण की नयी फसल बन कर खड़े हो जाते है.जो परिवार , समाज और देश के लिए घातक होते है ऐसे मां -बाप अपने बच्चों को क्या सही राहों पर चला सकते हैं जो खुद ही भ्रष्ट हैं! हमारे धरम ग्रंथों में ऐसे बहुत से उदाहरण हैं जहाँ पति के गलत कामों में पत्नी ने साथ देने से मना कर दिया और खुद को पति के गलत कामों से अलग कर लिया
बहुत हद तक बाज़ार भी दोषी है जो नित नए तरीकों से ग्राहकों को लुभाने के प्रयास करता है और ग्राहक उस जाल में फंस जाते है उनकी इक्छाएं भी सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती ही जाती है.नित नए आकर्षण , फैशन , वस्तुओं के चमक-दमक में आदमी की सही और गलत का निर्णय करने की समझ ही कहीं खो गयी है पत्नियाँ भी इसी भौतिक सुख-सुविधाओं , और फैशन के आकर्षण में साथ ही ,एक दूसरे से होड़ के चक्कर में पतियों से और अधिक, और पैसा की मांग करती रहती है जो की सर्वथा अनैतिक और अनुचित है. पत्नियों को जितनी पति की कमाई है उसी में संतोष करते हुए घर चलाना चाहिए.भ्रष्टाचार बढ़ने का ये भी एक बड़ा कारण हुआ है.
ये निर्णय शायद कुछ सकारात्मक प्रभाव लाये और महिलाएं अपनी भूमिका सही तरीके से निभाए पति को न तो गलत काम करने हेतु उकसाए, न ही भ्रष्टाचार में उनका साथ दें सकारात्मक भूमिका निभाते हुए परिवार , समाज और देश को भ्रष्टाचार से मुक्त बनाएं
अनुपमा श्रीवास्तव (अनुश्री), भोपाल ,म.प्र